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Wednesday 15 August 2018
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बुधबारको दिनमा यी ५ काम गर्नु हुदैन, जुन अशुभ मानिन्छ…

बुधबारको दिनमा यी ५ काम गर्नु हुदैन, जुन अशुभ मानिन्छ…

ज्योतिष शास्त्र : बुधबारको दिनमा पुरुष ससुराली जानु हुदैन , महिला को अपमान गर्नु हुदैन साथै अरु यी ५ काम गर्नु हुदैन [ हेर्नुस भिडियो सहित ]

कृष्ण लील

एक गोपी के घर लाला (श्री कृष्ण) माखन खा रहे थे.
उस समय गोपी ने लाला को पकड लिए.
तब कन्हैया बोले- तेरे धनी की सौगंध खा कर कहता हु,
अब फिर कभी भी तेरे घर में नहीं आऊंगा.

गोपी ने कहा – मेरे धनी की सौगंध क्यों खाता है ?
कन्हैया ने कहा. तेरे बाप की सौगंध ,बस…
गोपी और ज्यादा खीझ जाती है और लाला को धमकाती है
परन्तु तू मेरे घर आया ही क्यों?

कन्हैया ने कहा – अरी सखी! तू रोज कथा में जाती है,
फिर भी तू मेरा तेरा छोडती नहीं – इस घर का मै धनी हु, यह घर मेरा है
गोपी को आनंद हुआ कि मेरे घर को कन्हैया अपना घर मानता है, कन्हैया तो सबका मालिक है, सभी घर उसी के है. उसको किसी कि आज्ञा लेने कि जरूरत नहीं

गोपी कहती है – तुने माखन क्यों खाया ?
लाला ने कहा – माखन किसने खाया है ? इस माखन में चींटी चढ़ गई थी तो उसे निकलने को हाथ डाला. इतने में ही तू टपक पड़ी

गोपी कहती है. परन्तु लाला! तेरे ओंठो के उपर भी तो माखन चिपका हुआ है
कन्हैया ने कहा – चींटी निकालता था , तभी ओंठो के उपर भी मक्खी बैठ गई, उसको उड़ाने लगा तो माखन ओंठो पर लग गया होगा कन्हैया जैसे बोलतेहै,
ऐसा बोलना किसी को आता नहीं. कन्हैया जैसे चलते है,
वैसे चलना भी किसी को आता नहीं.

गोपी ने पीछे लाला को घर में खम्भे के साथ डोरी से बाँध दिया,
कन्हैया का श्री अंग बहुत ही कोमल है गोपी ने जब डोरी कस कर बाँधी तो लाला कि आँख में पानी आ गया. गोपी को दया आई ,

उसने लाला से पूछा – लाला! तुझे कोई तकलीफ है क्या?
लाला ने गर्दन हिला कर कहा – मुझे बहुत दुःख हो रहा है, डोरी जरा ढीली करो गोपी ने विचार किया कि लाला को डोरी से कस कर बाधना ठीक नहीं, मेरे लाला को दुःख होगा. इस लिए गोपी ने डोरी थोड़ी ढीली रखी और सखियो को खबर देने गई के मैंने लाला को बांधा है

तुम लाला को बांधो परन्तु किसी से कहना नहीं,
तुम खूब भक्ति करो, परन्तु उसे प्रकाशित मत करो,

भक्ति प्रकाशित हो जाएगी तो भगवान सटक जायेंगे, भक्ति का प्रकाश होने से भक्ति बढती नहीं , भक्ति में आनद आता नहीं.

बाल कृष्ण सूक्ष्म शरीर करके डोरी से बहार निकल गए
और गोपी को अंगूठा दिखा कर कहा, तुझे बांधना ही कहा आता है?
गोपी कहती है – तो मुझे बता , किस तरह से बांधना चाहिए
गोपी को तो लाला के साथ खेल करना था, लाला गोपी को बांधते है

योगीजन मन से श्री कृष्ण का स्पर्श करते है तो समाधि लग जाती है.
यहाँ तो गोपी को प्रत्यक्ष श्री कृष्ण का स्पर्श हुआ है. गोपी लाला के दर्शन में तल्लीन हो जाती है.

लाला ने गोपी को बाँध दिया.
गोपी कहती है के लाला छोड़! छोड़!
लाला कहते है – मुझे बांधना आता है.
छोड़ना तो आता ही नहीं

यह जीव एक एसा है, जिसको छोड़ना आता है,
चाहे जितना प्रगाढ़ सम्बन्ध हो
परन्तु स्वार्थ सिद्ध होने पर उसको भी छोड़ सकता है,
परमात्मा एक बार बाँधने के बाद छोड़ते नही।

बुधबारको दिनमा यी ५ काम गर्नु हुदैन, जुन अशुभ मानिन्छ…

जय श्री कृष्ण जी।।

श्रीकृष्ण भगवान द्वारका में रानी सत्यभामा के साथ सिंहासन पर विराजमान थे, निकट ही गरुड़ और सुदर्शन चक्र भी बैठे हुए थे। तीनों के चेहरे पर दिव्य तेज झलक रहा था। बातों ही बातों में रानी सत्यभामा ने श्रीकृष्ण से पूछा कि हे प्रभु, आपने त्रेता युग में राम के रूप में अवतार लिया था, सीता आपकी पत्नी थीं। क्या वे मुझसे भी ज्यादा सुंदर थीं ?

द्वारकाधीश समझ गए कि सत्यभामा को अपने रूप का अभिमान हो गया है। तभी गरुड़ ने कहा कि भगवान क्या दुनिया में मुझसे भी ज्यादा तेज गति से कोई उड़ सकता है। इधर सुदर्शन चक्र से भी रहा नहीं गया और वह भी कह उठे कि भगवान, मैंने बड़े-बड़े युद्धों में आपको विजयश्री दिलवाई है। क्या संसार में मुझसे भी शक्तिशाली कोई है ?

भगवान मंद-मंद मुस्कुरा रहे थे। वे जान रहे थे कि उनके इन तीनों भक्तों को अहंकार हो गया है और इनका अहंकार नष्ट होने का समय आ गया है। ऐसा सोचकर उन्होंने गरुड़ से कहा कि हे गरुड़! तुम हनुमान के पास जाओ और कहना कि भगवान राम, माता सीता के साथ उनकी प्रतीक्षा कर रहे हैं। गरुड़ भगवान की आज्ञा लेकर हनुमान को लाने चले गए।

इधर श्रीकृष्ण ने सत्यभामा से कहा कि देवी आप सीता के रूप में तैयार हो जाएं और स्वयं द्वारकाधीश ने राम का रूप धारण कर लिया। मधुसूदन नेसुदर्शन चक्र को आज्ञा देते हुए कहा कि तुम महल के प्रवेश द्वार पर पहरा दो। और ध्यान रहे कि मेरी आज्ञा के बिना महल में कोई प्रवेश न करे। भगवान की आज्ञा पाकर चक्र महल के प्रवेश द्वार पर तैनात हो गए।

उधर गरुड़ ने हनुमान के पास पहुंच कर कहा कि हे वानरश्रेष्ठ! भगवान राम माता सीता के साथ द्वारका में आपसे मिलने के लिए प्रतीक्षा कर रहे हैं। आप मेरे साथ चलें। मैं आपको अपनी पीठ पर बैठाकर शीघ्र ही वहां ले जाऊंगा। हनुमान ने विनयपूर्वक गरुड़ से कहा, आप चलिए, मैं आता हूं।

गरुड़ ने सोचा, पता नहीं यह बूढ़ा वानर कब पहुंचेगा। खैर मैं भगवान के पास चलता हूं। यह सोचकर गरुड़ शीघ्रता से द्वारका की ओर उड़े। पर यह क्या, महल में पहुंचकर गरुड़ देखते हैं कि हनुमान तो उनसे पहले ही महल में प्रभु के सामने बैठे हैं। गरुड़ का सिर लज्जा से झुक गया। तभी श्रीराम ने हनुमान से कहा कि पवन पुत्र तुम बिना आज्ञा के महल में कैसे प्रवेश कर गए ? क्या तुम्हें किसी ने प्रवेश द्वार पर रोका नहीं?

हनुमान ने हाथ जोड़ते हुए सिर झुका कर अपने मुंह से सुदर्शन चक्र को निकाल कर प्रभु के सामने रख दिया। हनुमान ने कहा कि प्रभु आपसे मिलने से मुझे इस चक्र ने रोका था, इसलिए इसे मुंह में रख मैं आपसे मिलने आ गया। मुझे क्षमा करें। और फिर भगवान मंद-मंद मुस्कुराने लगे।हनुमान ने हाथ जोड़ते हुए श्रीराम से प्रश्न किया हे प्रभु! आज आपने माता सीता के स्थान पर किस दासी को ।


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